Bajrang Baan Lyrics Hindi Arth Sahit | श्री बजरंग बाण पाठ (अर्थ सहित)

श्री बजरंग बाण पाठ (अर्थ सहित) — पूरी जानकारी हिंदी में

Bajrang Baan हनुमान जी की एक अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी स्तुति है। इसे “Bajrang Baan” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका पाठ बाण की तरह तेज़ी से संकट, भय, बुरी शक्तियों और शत्रुओं का नाश करता है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करते हैं, उनकी हर बाधा दूर होती है और हनुमान जी उनकी रक्षा करते हैं।

नीचे Bajrang Baan का पूरा पाठ, हर (Bajrang Baan Lyrics Hindi Arth Sahit) चौपाई के साथ सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है, ताकि हर भक्त इसे समझकर पूरी श्रद्धा के साथ पढ़ सके।

Bajrang Baan Lyrics Hindi Arth Sahit
Bajrang Baan Lyrics Hindi Arth Sahit

Bajrang Baan का महत्व

मान्यता है कि बजरंग बाण का पाठ करने से:

  • भय, चिंता और मानसिक अशांति दूर होती है
  • भूत-प्रेत, बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है
  • शत्रु बाधा और कोर्ट-कचहरी के मामलों में राहत मिलती है
  • साहस, आत्मविश्वास और शक्ति की प्राप्ति होती है
  • संकट के समय तुरंत सहायता मिलती है

पाठ करने से पहले हनुमान जी के सामने दीपक जलाना, स्वच्छ मन और पूर्ण श्रद्धा रखना आवश्यक माना जाता है।

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॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सन्मान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

अर्थ: जो व्यक्ति दृढ़ प्रेम, विश्वास और विनम्रता के साथ हनुमान जी का सम्मान और वंदन करता है, हनुमान जी उसके सभी शुभ कार्यों को सिद्ध (पूर्ण) कर देते हैं।


॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

अर्थ: हे संतों का हित करने वाले हनुमान जी, आपकी जय हो। हे प्रभु, हमारी विनती सुन लीजिए।

जन के काज विलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

अर्थ: अपने भक्त का कार्य करने में देर न कीजिए। शीघ्र दौड़कर आइए और महान सुख प्रदान कीजिए।


जैसे कूदि सिंधु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥

अर्थ: जैसे आपने समुद्र लांघकर पार किया और सुरसा के विशाल मुख में प्रवेश करके भी सुरक्षित निकले।

आगे जाइ लंकिनी रोका। मारहु लात गई सुर लोका॥

अर्थ: आगे बढ़ने पर जब लंकिनी राक्षसी ने रोका, तो आपने एक ही लात मारकर उसे स्वर्गलोक पहुंचा दिया।


जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा॥

अर्थ: आपने विभीषण को सुख और आशीर्वाद दिया, और माता सीता के दर्शन कर परम पद (महान गौरव) प्राप्त किया।

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥

अर्थ: आपने अशोक वाटिका उजाड़ दी, लंका को समुद्र में डुबो दिया और अत्यंत क्रोध में यमराज की भी परवाह नहीं की।


अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा॥

अर्थ: आपने अक्षय कुमार का वध किया और अपनी पूंछ में आग लगाकर पूरी लंका को जला डाला।

लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥

अर्थ: लंका लाख की तरह जलकर राख हो गई और स्वर्गलोक में चारों ओर “जय-जय” की ध्वनि गूंज उठी।


अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अंतरजामी॥

अर्थ: हे अंतर्यामी स्वामी, अब देर किस कारण कर रहे हैं? कृपया मेरे हृदय पर कृपा कीजिए।

जय जय लक्ष्मन प्राण के दाता। आतुर हैं दुख करहु निपाता॥

अर्थ: हे लक्ष्मण जी के प्राणदाता, आपकी जय हो। हम अत्यंत व्याकुल हैं, कृपया हमारे दुखों का नाश कीजिए।


जय जय हनुमंत जयति बल सागर। सुर समूह समरथ भट नागर॥

अर्थ: हे बल के सागर हनुमान जी, आपकी जय हो। आप देवताओं में समर्थ और वीर योद्धा हैं।

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥

अर्थ: हे दृढ़ संकल्पी हनुमान जी, आप वज्र के समान कठोर प्रहार से शत्रुओं का नाश करें।


ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीशा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥

अर्थ: हे वानरराज हनुमान जी, आप अपने बल से शत्रुओं के हृदय और सिर पर प्रहार करें।

जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकर सुवन बीर हनुमंता॥

अर्थ: हे अंजनी माता के बलशाली पुत्र, भगवान शिव के अंश और वीर हनुमान जी, आपकी जय हो।


बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रति पालक॥

अर्थ: आपका मुख अत्यंत विकराल है जो काल (मृत्यु) के कुल का भी नाश करने वाला है। आप सदा भगवान राम के सहायक और भक्तों के रक्षक हैं।

भूत प्रेत पिशाच निसाचर। अग्नि बेताल काल मारि मर॥

अर्थ: भूत, प्रेत, पिशाच, राक्षस, अग्नि बाधा, बेताल और काल का भय — इन सबका आप नाश करने वाले हैं।


इन्हैं मारु तोहि शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥

अर्थ: हे नाथ, श्रीराम की शपथ है, इन सब बुरी शक्तियों का नाश कीजिए और अपने नाम की मर्यादा बनाए रखिए।

सत्य होहु हरि शपथ पाइकै। राम दूत धरु मारु धाइकै॥

अर्थ: हे राम दूत, अपनी शपथ को सत्य सिद्ध करते हुए दौड़कर आइए और शत्रुओं को पकड़कर नष्ट कीजिए।


जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन कहि अपराधा॥

अर्थ: हे अथाह शक्ति वाले हनुमान जी, आपकी जय हो। बताइए, आपका भक्त किस अपराध के कारण दुख पा रहा है।

पूजा जाप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

अर्थ: आपका यह दास न तो सही पूजा-विधि जानता है, न जप-तप और न ही आचार-नियम, फिर भी मैं आपका सेवक हूं।


बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥

अर्थ: वन, उपवन, मार्ग, पर्वत या घर — कहीं भी हो, आपकी शक्ति के भरोसे मुझे कोई भय नहीं है।

जनक सुता हरि दास कहावौ। ताकी शपथ विलंब न लावौ॥

अर्थ: आप माता सीता (जनक सुता) के भक्त कहलाते हैं, उन्हीं की शपथ है, अब देर मत कीजिए।


जय जय जय धुनि होत अकासा। सुमिरत होत दुसह दुख नासा॥

अर्थ: आकाश में “जय-जय” की ध्वनि गूंजती है, और आपका स्मरण करते ही असहनीय दुख भी नष्ट हो जाते हैं।

चरण पकर, कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥

अर्थ: मैं आपके चरण पकड़कर, हाथ जोड़कर आपको मना रहा हूं। इस समय आपके अलावा और किसे पुकारूं?

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उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पायँ परौं कर जोरि मनाई॥

अर्थ: हे हनुमान जी, उठिए, चलिए, आपको श्रीराम की दुहाई है। मैं आपके चरणों में गिरकर हाथ जोड़कर विनती करता हूं।

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनुमंता॥

अर्थ: यह मंत्रात्मक आह्वान है — हे चंचल गति वाले, शीघ्र दौड़ते हुए आइए हनुमान जी।


ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि परान खल दल॥

अर्थ: आपकी हुंकार से चंचल वानर कांप उठते हैं, और आपकी गर्जना सुनकर दुष्टों के प्राण कांपने लगते हैं।

अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनंद हमारो॥

अर्थ: अपने भक्त को शीघ्र संकट से उबारिए, आपका स्मरण करते ही हमें आनंद की अनुभूति हो।


यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै॥

अर्थ: जिसे यह बजरंग बाण लक्षित करता है (अर्थात जो इसकी शक्ति के विरुद्ध है), उसे फिर कोई नहीं बचा सकता।

पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्राण की॥

अर्थ: जो भक्त इस बजरंग बाण का पाठ करता है, हनुमान जी सदैव उसके प्राणों की रक्षा करते हैं।


यह बजरंग बाण जो जापै। तासों भूत प्रेत सब कांपै॥

अर्थ: जो व्यक्ति इस बजरंग बाण का जाप करता है, उससे भूत-प्रेत जैसी सभी बुरी शक्तियां भयभीत होकर कांपने लगती हैं।

धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा॥

अर्थ: जो व्यक्ति नियमित रूप से धूप देकर इसका जाप करता है, उसके शरीर में कभी कोई कष्ट नहीं रहता।


॥ दोहा ॥

उर प्रतीति दृढ़ सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान। बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

अर्थ: जो भक्त हृदय में दृढ़ विश्वास रखकर, पूर्ण शरणागति के भाव से ध्यानपूर्वक इस पाठ को करता है, हनुमान जी उसकी सभी बाधाओं को दूर कर उसके हर कार्य को सफल बनाते हैं।


बजरंग बाण पाठ विधि

  1. मंगलवार या शनिवार को पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है
  2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
  3. हनुमान जी के सामने दीपक और धूप जलाएं
  4. पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पाठ करें
  5. पाठ के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है

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Bajrang Baan Lyrics English

॥ Doha ॥

Nishchay Prem Prateet Tey,
Vinay Karain Sanmaan ।
Tayhi-Ke Karaj Sakal Shubha,
Siddh Karain Hanuman ॥

॥ Chaupai ॥

Jai Hanumanta Santa Hitakaari ।
Suna Liijay Prabhu Araja hamari ॥
Jana kay kaaja vilambana keejay ।
Aatura dawrii maha Sukha deejay ॥

Jaisay kooda sindhu mahi paara ।
Sursa badana paithii Vistaara ॥
Aagay jaiyii Lankinii Rokaa ।
Maarayhu laata gaii sura Loka ॥

Jaayay Vibhishan ko sukha deenha ।
Sita Nirakhi parama pada Leenhaa ॥
Baag ujaari Sindhu Mahana Borah ।
Ati Aatura Jama Kaatara tora ॥

Akshaya Kumara mara sanhaara ।
Loama lapaita Lanka-ko Jaarah ॥
Laaha samaan lanka jaari-gai ।
Jai Jai Dhwani surpur naba Bhai ॥

Aba vilambha kayhi Kaaran Swami ।
Kripaa Karahhu ura Antaraymii ॥
Jai Jai Lakshmana Praana kay daataa ।
Aatura hai dukha Karhu Nipaataa ॥

Jai Jai Hanumanta Jayati bala saagar ।
Sura Samooha samratha Bhata Naagar ॥
Om Hanu Hanu Hanu Hanumanta Hateelay ।
Bhairayhhi Maaru Bajrah-Ki Keelay ॥

Om Hrim Hrim Hrim Hanumana Kapisha ।
Om Hun Hun Hun Hanu Arii Ura Sheesha ॥
Jai Anjani Kumara Balawanta ।
Shankara Suwana Beera Hanumanta ॥

Badana Karaala kaala kula ghaalaka ।
Rama sahay sadaa prati Paalak ॥
Bhoota prayta pishacha nischaara ।
Agni Baitala kaal maari mar ॥

Inhain maaru tohi shapatha Ram ki ।
Raakhu natha Maarayad Naama ki ॥
Satya hahu Hari Shapatha paiikay ।
Rama doota dharu maaru Dhaiikay ॥

Jai jai Jai Hanumanta Agadha ।
Dukha Pavata Jaana Kayhi apraadha ॥
Pooja jaapa tapa naima achaara ।
Nahina Jaanat Kacchu-das tumhaaraa ॥

Baan upawaan maaga-girigraha manhi ।
Tumharay Bala hoo Darpata Nahin ॥
Janaka Suta Hari Das Kahawoh ।
Taaki shapatha Vilamba na laawoh ॥

Jai Jai Jaya Dhuni Hota Akaasha ।
Sumirata Hota Dusah Dukha Nasha ॥
Charana pakar jori mana-oan ।
Yahi awsara aba kayhi gohra-oan ॥

Uthu Uthu Chalu Tohi Rama Duhai ।
Paayain paroan kara jori manaayaii
Om Cham Cham Cham Cham Chapal Chalantaa ।
Om Hanu Hanu Hanu Hanumantaa ॥

Om Ham Ham Hanka Day-tah Kapi Chanchal ।
Om San San Sahami Paraanay khal Dala ॥
Apnaay jaana ko turata ubaaro ।
Sumirata hoya ananda hamaaroh ॥

Yaha Bajaranga Baan Jayhi Maaray ।
Taahi Kaho phir kahana ubaaray ॥
Paatha karay Bajranga Baana ki ।
Hanumanata Raksha Karayne Praana ki ॥

Yaha Bajranga Baana Jo Jaapay ।
Taataay Bhoota Pray-tah Saba Kaampay ॥
Dhoopa-day aru Japayne Hamaayshaa ।
Takay tana Nahina Rahay Kalesha ॥

॥ Doha ॥

Ura Pratitee Dhardh, Saran Havay,
Paath karay dhari Dhyaan ।
Badha Sab Har,
Karain Sab Kaam Safal Hanuman ॥

Bajrang Baan Lyrics in Gujarati

દોહા

નિશ્વય પ્રેમ પ્રતિતતે, વિનય કરૈ સન્માન
તેહિ કે કારજ સકલ શુભ સિદ્ઘ કરૈ હનુમાન

ચોપાઈ
જય હનુમંત સંત હિતકારી । સુન લીજે પ્રભુ અરજ હમારી ॥
જનકે કાજ વિલંબ ન કીજૈ । આતુર દૌરિ મહા સુખ દીજૈ ॥

જૈસે કૂદિ સિન્ધુ મહિપારા । સુરસા બદન પૈઠિ વિસ્તારા ॥
આગે જાય લંકિની રોકા । મારેહુ લાત ગઈ સુરલોકા ॥

જાય વિભીષણકો સુખ દીન્હા । સીતા નિરખી પરમ પદ લીન્હા ॥
બાગ ઉજારી સિંધુ મઁહ બોરા । અતિ આતુર જમકાતર તોરા ॥

અક્ષય કુમાર કો મારી સંહારા । લૂમ લપેટ લંક કો જારા ॥
લાહ સમાન લંક જરિ ગઈ । જય જય ધ્વનિ સુરપુર મહ ભઈ ॥

અબ વિલમ્બ કેહિ કારન સ્વામી । કૃપા કરહુ ઉર અન્તર્યામી ॥
જય જય લખન પ્રાણ કે દાતા । આતુર હોય દુઃખ કરહુ નિપાતા ॥

જય હનુમાન જયતિ બલ-સાગર । સૂર-સમૂહ-સમરથ ભટ-નાગર ॥
ૐ હનુ હનુ હનુ હનુમંત હઠીલે । બૈરિહિં મારૂ વજ્ર કી કીલે ॥

ૐ હ્રીં હ્રીં હ્રીં હનુમાન કપીસા । ૐ હુઁ હુઁ હુઁ હનુ અરિ ઉર સીસા ॥
જય અંજનિ કુમાર બલવંતા । શંકર સુવન વીર હનુમંતા ॥

બદન કરાલ કાલ કુલ ધાલક । રામ સહાય સદા પ્રતિપાલક ॥
ભૂત પ્રેત પિશાચ નિશાચર । અગ્નિ બૈતાલ કાલ મારી મર ॥

ઈન્હેં મારૂ તોહિ શપથ રામ કી । રાખુ નાથ મરજાદ નામ કી ॥
સત્ય હોહુ હરિ શપથ પાય કે । રામદૂત ધરૂ મારૂ ધાઈ કૈ ॥

જય જય જય હનુમંત અગાધા । દુઃખ પાવત જન કેહિ અપરાધા ॥
પૂજા જપ તપ નેમ અચારા । નહિં જાનત કછુ દાસ તુમ્હારા ॥

વન ઉપવન મગ,ગિરી ગૃહ માઁહી । તુમ્હારે બલ હૌં ડરપત નાહીં ॥
જનકસુતા હરિ દાસ કહાવૌ । તાકી સપથ વિલંબઅ લાવૌ ॥

જય જય જય ધુનિ હોત અકાસા ॥ સુમિરત હોત દુસહ દુઃખ નાસા ॥
ચરણ પકરિ કર જોરિ મનાવૌં । યહિ ઓસર અબ કેહિ ગોહરાવૌં ॥

ઉઠુ ઉઠુ ચલુ તોહિ રામ દુહાઈ । પાઁય પરૌં કર જોરિ મનાઈ ॥
ૐ ચં ચં ચં ચપલ ચલંતા । ૐ હનુ હનુ હનુ હનુ હનુ હનુમંતા ॥

ૐ હં હં હાઁક દેત કપિ ચંચલ । ૐ સં સં સમહિ પરાને ખલ દલ ॥
અપને જનકો તુરત ઉબારો । સુમિરત હોય આનંદ હમારો ॥

યહ બજરંગ બાણ જેહિ મારૈ । તાહિ કહૌ ફિરિ કૌન ઉબારૈ ॥
પાઠ કરે બજરંગ બાણ કી । હનુમંત રક્ષા કરૈ પ્રાણ કી ॥

યહ બજરંગ બાણ જો જાપૈ । તાસોં ભૂત પ્રેત સબ કાઁપે ॥
ધૂપ દેય જો જપૈં હમેશા । તાકે તન નહીં રહૈ કલેશા ॥

દોહા

ઉર પ્રતીતિ દ્રઢ, સરન હવૈ, પાઠ કરૈ ધરિ ધ્યાન.
બાધા સબ હર, કરૈ સબ કામ સફલ હનુમાન.

અથવા

પ્રેમ પ્રતિતહિ કપિ ભજૈ, સદા ધરૈ ઉર ધ્યાન.
તેહિ કે કારજ સકલ શુભ, સિદ્ઘ કરૈં હનુમાન.

-ગોસ્વામી તુલસીદાસ વિરચિત

निष्कर्ष

बजरंग बाण केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच विश्वास की एक शक्तिशाली कड़ी है। श्रद्धा, नियम और सच्चे मन से किया गया यह पाठ भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है, और जीवन में साहस, शांति व सफलता लाता है।

जय बजरंग बली, जय हनुमान।

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